गलती करने पर बच्चों को सजा देने के बजाय अपनाएं ये 7 क्रिएटिव तरीके
गलती करने पर बच्चों को सजा देने के बजाय अपनाएं ये 7 क्रिएटिव तरीके
अगर बच्चों से कोई गलती हो जाए तो उन्हें सजा देने से बजाय उनकी गलतियों का एहसास करवाना जरूरी है। कुछ क्रिएटिव तरीके आपके काम आ सकते हैं।
अकसर बच्चे अनजाने में कुछ गलतियां कर देते हैं और माता-पिता उन्हें सजा देकर उससे भी बड़ी गलती करते हैं। बच्चों को अगर उनकी गलतियों का एहसास करवाना है तो कुछ क्रिएटिव तरीकों को अपनाना जरूरी है। उन्हें सजा देकर आप उन्हें गलतियां करने के और प्रेरित कर सकते है। आज का हमारा लेख उन्हीं क्रिएटिव तरीकों पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप बच्चों को सजा देने के बजाय किन-किन तरीकों को अपनाकर बच्चों को गलती का एहसास करवा सकते हैं। इसके लिए हमने गोवा यूनिवर्सिटी से पढ़ी आकांक्षा मिश्रा (Mrs. Akanksha Mishra, B.ed, Child Counselor & Life Coach) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे....
1 - बच्चों से करवाएं एक्सरसाइज
बच्चे थोड़े से आलसी और थोड़े से जिद्दी होते हैं। ऐसे में उन्हें एक्सरसाइज करने के लिए कहना उनके लिए किसी सजा से कम नहीं होता। अगर बच्चे से कोई गलती हो जाए तो आप उसे सजा के रूप में एक्सरसाइज करने के लिए कह सकते हैं। एक्सरसाइज के रूप में भी आप उनसे सीढ़िया चढ़वा सकते हैं, कूदने के लिए कह सकते हैं या साइकिल चलाने के लिए कह सकते हैं। आसान व्यायाम से बच्चा तंदुरुस्त रहेगा और उसे अपनी गलती का एहसास होगा।
2 - बच्चों को जल्दी सुलाएं
अकसर बच्चे निश्चित समय पर सोते हैं और निश्चित समय पर ही उठते हैं। डॉक्टर भी कहते हैं कि अगर बच्चे में अनिद्रा की समस्या को दूर करना है तो उनके सोने का समय तय करना जरूरी है। ऐसे में अगर कभी बच्चे से कोई गलती हो जाए तो आप उसे जल्दी सोने की सजा दे सकते हैं। क्योंकि उनकी आदत तय समय पर सोने की है ऐसे में जल्दी सोने पर भी बच्चों को नींद नहीं आएगी, इससे उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होगा और वह आगे से लापरवाही नहीं करेंगे।
3 - घर की क्लीनिंग के लिए कहें
अगर अपने बच्चे को सजा देनी है तो आप बच्चों से घर की सफाई भी करवा सकते हैं। आप चाहे तो उनसे उनकी अल्मारी साफ करवा सकते हैं या फिर घर की धूल मिट्टी आदि को साफ करने के लिए कह सकते हैं। यह भी उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है। अकसर बच्चे क्लीनिंग करने से कतराते हैं ऐसे में जब आप उनसे क्लीनिंग करने के लिए कहेंगे तो मैं आगे से कोई गलती करने से पहले एक बार जरूर सोचेंगे।
4 - फेवरेट कार्टून ना देखने की पनिशमेंट
बच्चे अपने जल्दी-जल्दी काम इसलिए निपटाते हैं, जिससे कि वह अपने फेवरेट कार्टून को सही समय पर टीवी पर देख पाएं। यहीं कारण होता है बच्चे अपनी पढ़ाई का काम भी जल्दी पूरा कर लेते हैं। ऐसे में अगर उनसे कोई गलती हुई है तो आप उन्हें उनके फेवरेट कार्टून को देखने से रोक सकते हैं। यह भी उनके लिए किसी सजा से कम नहीं होगा। जिस वक्त उनका फेवरेट कार्टून आए तो आप उन्हें आप किसी और में काम में लगाएं। जब आप एक बार उन्हें उनका फेवरेट कार्टून नहीं देखने देंगे तो वे भविष्य में गलती करने से बचेंगे।
5 - दौड़ने के लिए कहें
जैसे कि हमने पहले भी बताया बच्चों के लिए एक्सरसाइज करने के लिए कहना किसी सजा से कम नहीं होता। ऐसे में अगर आप चाहे तो बच्चों को दौड़ने के लिए भी कह सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर दौड़ने से बच्चों की सेहत अच्छी होती है लेकिन बच्चों के लिए यह किसी सजा से कम नहीं है। ऐसे में यदि बच्चा कोई गलती करता है और आपको उसका एहसास करवाना है तो आप बच्चों को सुबह जल्दी उठकर दौड़ने के लिए कह सकते हैं। ऐसा करने से बच्चे आगे चलकर गलतियों या कोई गलत काम करने पहले से सोचेंगे।
6 -लंच सर्व करवाएं
अकसर बच्चों को लंच सर्व करने की आदत नहीं होती है और वह अपना खाना खुद ले भी नहीं पाते हैं। ऐसे में माता-पिता बच्चों को लंच सर्व करने के लिए कह सकते हैं। ऐसा करना भी बच्चों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। लंच सर्व करते वक्त आप यह भी कह सकते हैं कि खाना इधर-उधर नहीं गिरना चाहिए। ऐसे में बच्चा आगे से गलती करने से पहले सोचेगा।
7 - पेंटिंग करने के लिए कहें
अक्सर बच्चे क्रिएटिविटी पर ज्यादा ध्यान ना देकर केवल अपनी पढ़ाई पर, खेल पर और टीवी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसे में यदि बच्चे से कोई गलती हो जाए तो आप उन्हें कोई क्रिएटिव चीजें जैसे- पेंटिंग एंड ड्रॉइंग करने के लिए कह सकते हैं। यह भी उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है वे आगे से गलती करने से पहले सोचेंगे।
नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि बच्चों को सजा देने से अच्छा है कि उन्हें उनकी गलतियों का एहसास कराया जाए। ऐसे में ऊपर बताए गए कुछ तरीके माता-पिता के बेहद काम आ सकते हैं। इन तरीकों को अपनाकर आप अपने बच्चों को सजा देने से बच जाएंगे और उन्हे अपनी गलती का एहसास भी हो जाएगा।
ये लेख गोवा यूनिवर्सिटी से पढ़ी आकांक्षा मिश्रा (Mrs. Akanksha Mishra, B.ed, Child Counselor & Life Coach) से बातचीत पर आधारित है।
इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ गूगल से ली गई हैं।
Diptiman Mishra







I will follow it on my child 👌
ReplyDeleteVery Good sir
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